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Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन 11 और 12 अगस्त को, जानें राखी बांधने का शुभ समय

राखी बांधते समय पढ़ें ये मंत्र.

  • ‘ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
  • तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल:।

रक्षा बंधन पर शुभ मुहूर्त का महत्व.

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हिंदू धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा है. पंचांग के अनुसार शुभ समय में ही मांगलिक कार्य करने चाहिए. शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर कार्य करता है, उसे सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है.

राखी बंधवाते समय इस दिशा में हो भाई का मुख.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूरब दिशा में और बहन का पश्चिम दिशा में होना चाहिए.

पौराणिक कथा है प्रसिद्ध.

एक कथा के अनुसार जब भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली से खून बहने लगा था. कृष्ण जी के हाथ से खून बहता देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा चीरकर उनकी उंगली में बांध दिया. कहा जाता है कि यहीं से भगवान कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन मान लिया था.

काले धागे का प्रयोग न करें.

राखी के दिन इस बात का विशेष ध्यान दें कि काले रंग का सूत्र का प्रयोग नहीं होना चाहिए. शास्त्रों में भी माना जाता है कि ये रंग नकाराकत्मकता को दर्शता है.

11और 12 अगस्त दोनों दिन है पूर्णिमा तिथि.

इस वर्ष रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) 11 और 12 अगस्त को पड़ रहा है. द्रिक पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि  11 अगस्त को सुबह 10:38 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त 2022 को सुबह 07:05 बजे समाप्त होगी. चूंकि इस बार सावन पूर्णिमा के साथ ही भद्रा भी पहले भाग के दौरान प्रबल है, ऐसे में भद्रा के समाप्त होने के बाद ही भाई-बहन राखी बांध सकते हैं. भद्रा रात 08:51 बजे समाप्त हो रही है.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त.

राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त गुरुवार 11 अगस्त की शाम से शुरू होकर शुक्रवार 12 अगस्त तक रहेगा. द्रिक पंचांग के अनुसार भाई-बहन रात 08:51 बजे से रात 09:13 बजे तक राखी बांध सकते हैं. इसके अलावा 12 अगस्त को भद्रा नहीं है. हालांकि पूर्णिमा सुबह 07:16 बजे तक ही रहेगी. साथ ही राखी का पर्व भद्रा पंच के समय भी मनाया जा सकता है, जो 11 अगस्त को सायं 05:17 से सायं 06:18 तक रहेगा.

रक्षा बंधन पौराणिक कथा.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत में गलती से सुदर्शन चक्र से भगवान कृष्ण की उंगली कट गई थी. यह देख राजकुमारी द्रौपदी ने उंगली से बहते खून को रोकने के लिए कपड़े का एक टुकड़ा बांध दिया. भगवान कृष्ण द्रौपदी की भावनाओं से बहुत प्रभावित हुए और बदले में, दुनिया की सभी बुराइयों से उसकी रक्षा करने का वादा किया. द्रौपदी के चीरहरण के दौरान, जब कौरवों ने उसे शर्मसार करने और नीचा दिखाने की कोशिश की, तो भगवान कृष्ण ने उन्हें अपमान से बचाकर अपना वादा निभाया.

 

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